Article 20

Fundamental Rights : Article 12-35 : Part III
Right to Freedom : Article 19-22

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Article 20.

Protection in respect of conviction for offences

(1) No person shall be convicted of any offence except for violation of a law in force at the time of the commission of the act charged as an offence, not be subjected to a penalty greater than that which might have been inflicted under the law in force at the time of the commission of the offence.
(2) No person shall be prosecuted and punished for the same offence more than once.
(3) No person accused of any offence shall be compelled to be a witness against himself.

अनुच्छेद 20.

अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण

(1) कोई व्यक्ति किसी अपराध के लिए तब तक सिद्धदोष नहीं ठहराया जाएगा, जब तक कि उसने ऐसा कोई कार्य करने के समय, जो अपराध के रूप में आरोपित है, किसी प्रवृत्त विधि का अतिक्रमण नहीं किया है या उससे अधिक शास्ति का भागी नहीं होगा जो उस अपराध के किए जाने के समय प्रवृत्त विधि के अधीन अधिरोपित की जा सकती थी।
(2) किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक बार से अधिक अभियोजित और दंडित नहीं किया जाएगा।
(3) किसी अपराध के लिए अभियुक्त किसी व्यक्ति को स्वयं अपने विरुद्ध साक्षी होने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।