Article 246

Relations Between Union and States : Article 245-263 : Part XI

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Article 246.

Subject-matter of laws made by Parliament and by the Legislatures of States

(1) Notwithstanding anything in clauses (2) and (3), Parliament has exclusive power to make laws with respect to any of the matters enumerated in List I in the Seventh Schedule (in this Constitution referred to as the “Union List”).

(2) Notwithstanding anything in clause (3), Parliament, and, subject to clause (1), the Legislature of any State also, have power to make laws with respect to any of the matters enumerated in List III in the Seventh Schedule (in this Constitution referred to as the “Concurrent List”).

(3) Subject to clauses (1) and (2), the Legislature of any State has exclusive power to make laws for such State or any part thereof with respect to any of the matters enumerated in List II in the Seventh Schedule (in this Constitution referred to as the “State List”).

(4) Parliament has power to make laws with respect to any matter for any part of the territory of India not included in a State notwithstanding that such matter is a matter enumerated in the State List.

अनुच्छेद 246.

संसद द्वारा और राज्यों के विधान-मंडलों द्वारा बनाई गई विधियों की विषय-वस्तु

(1) खंड (2) और खंड (3) में किसी बात के होते हुए भी, संसद को सातवीं अनुसूची की सूची 1 में (जिसे इस संविधान में ''संघ सूची'' कहा गया है) प्रगणित किसी भी विषय के संबंध में विधि बनाने की अनन्य शक्ति है। 
(2) खंड (3) में किसी बात के होते हुए भी, संसद को और खंड (1) के अधीन रहते हुए, 1*** किसी राज्य के विधान-मंडल को भी, सातवीं अनुसूची की सूची 3 में (जिसे इस संविधान में ''समवर्ती सूची'' कहा गया है) प्रगणित किसी भी विषय के संबंध में विधि बनाने की शक्ति है।

(3) खंड (1) और खंड (2) के अधीन रहते हुए, 1*** किसी राज्य के विधान-मंडल को, सातवीं अनुसूची की सूची 2 में (जिसे इस संविधान में ''राज्य सूची'' कहा गया है) प्रगणित किसी भी विषय के संबंध में उस राज्य या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाने की अनन्य शक्ति है।
(4) संसद को भारत के राज्यक्षेत्र के ऐसे भाग के लिए 2[जो किसी राज्य] के अंतर्गत नहीं है, किसी भी विषय के संबंध में विधि बनाने की शक्ति है, चाहे वह विषय राज्य सूची में प्रगणित विषय ही क्यों न हो।